Showing posts with label विवेक. Show all posts
Showing posts with label विवेक. Show all posts

13 August 2016

विवेक संस्कृत भाषा में विवेक का अर्थ होता है



संस्कृत भाषा में विवेक का अर्थ होता है- "अलग- अलग करना ( समझना )।
दो मिली हुई वस्तुओं को अलग- अलग करने या समझने की कला को विवेक कहते हैं ।इसमें सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है- हंस ।जिसकी प्रसिद्धि ही नीर-क्षीर-"विवेकी"
के नाम से है,वह मिले हुए दूध और पानी को अलग-अलग कर देता है- ऐसा माना जाता है ।अतः "मिलित वस्तुओं की अलग- अलग जानकारी करके समझना - विवेक कहलाता है-शब्दार्थ की दृष्टि से ।
दार्शनिक धरातल पर इसके अनेक रूप देखने मिलते है, पर इसके मूल शब्दार्थ को साथ लेकर ही ।
वेदान्त के अनुसार नित्य-और अनित्य वस्तु का भेद समझ जाना विवेक है ।
योग और सांख्य में प्रकृति- पुरुष का पार्थक्य ज्ञान विवेक कहलाता है ....
सब दर्शनों की चर्चा सम्भव नहीं है, पर विचार सभी दर्शनों में है इस पर ।
विवेकी हो जाने की पहचान ये है कि दोषों का त्याग और गुणों का ग्रहण हम बिना किसी की प्रेरणा या सहायता के अपने आप करने लगें ।
मुझे इतना ही समझ आया ,जो संक्षेप में निवेदन किया।
लिखते लिखते निर्धारित सभय सीमा से 7 मिनिट ज्यादा हो गये- तदर्थ क्षमा याचना के साथ सभी महानुभावों को नमन ।सभी के विचार पढ़कर आनन्द हुआ
सादर
(धीरेन्द्र चतुर्वेदः )